साल की 26 एकादशियों के व्रत में क्या मानीय है और क्या वर्जित है ?
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एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना गया है। चाहे वह साल की 24 सामान्य एकादशियाँ हों या अधिक मास की 2 (कुल 26), सभी के लिए यम-नियम एक समान होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत में क्या मान्य (करणीय) है और क्या वर्जित (निषेध) है, इसकी विस्तृत सूची यहाँ दी गई है:
1. क्या मान्य है? (क्या करना चाहिए)
* दशमी से संयम: व्रत की तैयारी दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाती है। दशमी को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें या बहुत हल्का सात्विक भोजन लें।
* ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ है।
* संकल्प: हाथ में जल और तिल लेकर अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
* तुलसी पूजन: भगवान विष्णु को तुलसी दल (पत्ता) अवश्य अर्पित करें, क्योंकि उनके बिना वे भोग ग्रहण नहीं करते। (ध्यान रहे: पत्ता एक दिन पहले तोड़ लें)।
* दीप दान और जागरण: रात्रि में दीप जलाएं और संभव हो तो भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
* पारण का नियम: द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ही व्रत खोलें। पारण के समय ब्राह्मण को दान या भोजन कराना श्रेष्ठ है।
* क्षमा और दान: इस दिन दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। जरूरतमंदों को अन्न, जल या वस्त्र दान करें।
2. क्या वर्जित है? (क्या नहीं करना चाहिए)
* चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना और बनाना दोनों वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन चावल में 'महर्षि मेधा' का अंश होता है, जो मिट्टी में समा गए थे।
* अन्न और नमक: साधारण नमक, गेहूं, जौ, मक्का और सभी प्रकार की दालें वर्जित हैं। केवल सेंधा नमक और फलाहार मान्य है।
* तुलसी दल तोड़ना: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को छूना या उसके पत्ते तोड़ना वर्जित है।
* तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और मसूर की दाल का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
* व्यवहार पर नियंत्रण: इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, दूसरों की बुराई (परनिंदा) करना और कठोर शब्द बोलना पाप माना जाता है।
* शारीरिक शुद्धि: एकादशी पर बाल काटना, नाखून काटना और साबुन-तेल का अत्यधिक प्रयोग करने से बचना चाहिए।
* ब्रह्मचर्य: एकादशी की रात को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
विशेष सावधानियाँ (26 एकादशियों के लिए)
| विषय | नियम |
|---|---|
| दातुन/ब्रश | एकादशी को दातुन नहीं करना चाहिए (पेड़ की टहनी तोड़ना मना है), केवल कुल्ला करके मुख शुद्ध करें। |
| सब्जियाँ | गोभी, पालक और बैंगन जैसी सब्जियों से परहेज करना चाहिए। |
| फल | जूठे या कटे हुए बासी फल न खाएं। |
> एक विशेष बात: यदि आप किसी कारणवश व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी एकादशी के दिन चावल और तामसिक भोजन का त्याग करना पुण्य फलदायी होता है।
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