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भारत सरकार का 'एग्री-स्टैक' (AgriStack) प्रोजेक्ट भारतीय कृषि क्षेत्र का "UPI क्षण" माना जा रहा है। यह एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसका लक्ष्य देश के हर किसान को एक अनूठी डिजिटल पहचान देना और पूरी खेती-किसानी के डेटा को एक सूत्र में पिरोना है।
इसे डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) के तहत 2024 में लॉन्च किया गया था।
एग्री-स्टैक के तीन मुख्य स्तंभ (Core Components)
एग्री-स्टैक मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण रजिस्ट्रियों (डेटाबेस) पर टिका है:
* किसान रजिस्ट्री (Farmer Registry): प्रत्येक किसान को एक 11-अंकों वाली विशिष्ट 'किसान आईडी' (Farmer ID) प्रदान की जाती है। यह आधार की तरह काम करती है, जो किसान की जनसांख्यिकीय जानकारी, बैंक खाते और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी होती है। (लक्ष्य: 2026-27 तक 11 करोड़ आईडी)।
* भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र (Geo-referenced Village Maps): इसमें खेतों की सीमाओं का डिजिटल मानचित्रण होता है, जिससे यह पता चलता है कि किस किसान का खेत कहाँ और कितना बड़ा है।
* फसल बोने की रजिस्ट्री (Crop Sown Registry): 'डिजिटल फसल सर्वेक्षण' (Digital Crop Survey) के माध्यम से यह रिकॉर्ड रखा जाता है कि किस मौसम में कौन सी फसल बोई गई है।
AI और आधुनिक तकनीक का एकीकरण (2026 अपडेट)
प्रोजेक्ट अब केवल डेटा तक सीमित नहीं है, इसमें AI को गहरे स्तर पर जोड़ा गया है:
* भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR): यह एक बहुभाषी AI टूल है जो एग्री-स्टैक के डेटा का उपयोग करके किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में सलाह देता है।
* किसान ई-मित्र (Kisan e-Mitra): यह एक AI चैटबॉट है जो किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान करता है और सरकारी योजनाओं की जानकारी देता है।
* सटीक सलाह: AI यह विश्लेषण करता है कि किसी विशेष किसान के खेत (किसान आईडी से लिंक) की मिट्टी कैसी है और वहां कौन सी फसल सबसे अच्छी होगी।
किसानों को होने वाले प्रमुख लाभ
| सुविधा | एग्री-स्टैक से पहले | एग्री-स्टैक के बाद |
|---|---|---|
| ऋण (Loans) | लंबी कागजी कार्रवाई और बैंक के चक्कर। | डिजिटल किसान आईडी से 'पेपरलेस' और तुरंत लोन। |
| बीमा (Insurance) | नुकसान का आकलन करने में महीनों का समय। | AI और सैटेलाइट डेटा से तुरंत और सटीक दावा भुगतान। |
| योजनाएं (DBT) | बिचौलियों का डर और भ्रष्टाचार। | सीधे बैंक खाते में (Direct Benefit Transfer) पारदर्शिता के साथ। |
| खाद और बीज | वितरण में अनियमितता। | वास्तविक आवश्यकता के आधार पर आपूर्ति। |
वर्तमान स्थिति (2026 की प्रगति)
* अब तक 8.5 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं।
* 29 से अधिक राज्यों ने केंद्र सरकार के साथ इसके कार्यान्वयन के लिए समझौते (MoUs) किए हैं।
* महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने फसल नुकसान के दौरान राहत राशि सीधे एग्री-स्टैक के जरिए वितरित करना शुरू कर दिया है।
> महत्वपूर्ण बात: एग्री-स्टैक में डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें 'सहमति प्रबंधक' (Consent Manager) की व्यवस्था है, यानी किसान की अनुमति के बिना उसका डेटा किसी भी निजी कंपनी या एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता।
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