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भारतीय और विदेशी बॉन्ड बाजारों (जैसे अमेरिकी बॉन्ड) के बीच रिटर्न की तुलना करते समय कई महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं। वर्तमान समय (जनवरी 2026) की स्थितियों के अनुसार, यहाँ एक विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
1. रिटर्न (Yield) की तुलना
साधारण शब्दों में कहें तो भारतीय बॉन्ड बाजार में ब्याज दरें (Yields) विकसित देशों (जैसे अमेरिका, यूरोप या जापान) की तुलना में अधिक होती हैं।
* भारतीय बॉन्ड (10-वर्षीय G-Sec): वर्तमान में भारत के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न लगभग 6.64% से 6.70% के आसपास है।
* अमेरिकी बॉन्ड (10-वर्षीय Treasury): अमेरिका में यह दर लगभग 4.20% से 4.30% के आसपास बनी हुई है।
निष्कर्ष: यदि आप केवल ब्याज दर (Coupon Rate) देख रहे हैं, तो भारतीय बॉन्ड में रिटर्न ज्यादा है।
2. मुद्रा का प्रभाव (Currency Impact)
विदेशी निवेश के मामले में सबसे बड़ा जोखिम 'मुद्रा का उतार-चढ़ाव' होता है।
* यदि आप भारतीय हैं और अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करते हैं, तो आपको डॉलर की मजबूती का फायदा मिल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आपका वास्तविक रिटर्न बढ़ जाएगा।
* हाल के आंकड़ों के अनुसार, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है (लगभग ₹91 के करीब), जिससे भारतीय बॉन्ड से मिलने वाले वास्तविक मुनाफे में विदेशी निवेशकों को कुछ नुकसान भी उठाना पड़ा है।
3. मुद्रास्फीति (Inflation)
* भारत में महंगाई दर आमतौर पर अमेरिका या यूरोप की तुलना में अधिक रहती है।
* वास्तविक रिटर्न (Real Return) = बॉन्ड यील्ड - महंगाई।
* अगर भारत में महंगाई 5% है और बॉन्ड 6.7% दे रहा है, तो आपका वास्तविक मुनाफा केवल 1.7% है। यदि अमेरिका में महंगाई 2% है और बॉन्ड 4.2% दे रहा है, तो वहां वास्तविक मुनाफा 2.2% हो सकता है।
4. निवेश की सुलभता और लिक्विडिटी
| विशेषता | भारतीय बॉन्ड बाजार | विदेशी (जैसे US) बॉन्ड बाजार |
|---|---|---|
| रिटर्न | उच्च (High) | कम (Lower) |
| स्थिरता | विकासशील बाजार के कारण थोड़ी अस्थिरता | वैश्विक सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven) |
| इंडेक्स शामिल होना | भारतीय बॉन्ड अब JP Morgan और Bloomberg जैसे ग्लोबल इंडेक्स में शामिल हो रहे हैं, जिससे विदेशी पैसा बढ़ रहा है। | पहले से ही वैश्विक पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा हैं। |
आपके लिए क्या बेहतर है?
* ज्यादा ब्याज के लिए: यदि आपका लक्ष्य नियमित और अधिक ब्याज आय है, तो भारतीय बॉन्ड (जैसे RBI Floating Rate Bonds या G-Sec) बेहतर हैं।
* सुरक्षा और करेंसी हेजिंग के लिए: यदि आप अपने पोर्टफोलियो को भारतीय बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना चाहते हैं और डॉलर की मजबूती का लाभ लेना चाहते हैं, तो विदेशी बॉन्ड (ETF के जरिए) एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
> नोट: भारतीय निवेशकों के लिए सीधे विदेशी बॉन्ड खरीदना कठिन हो सकता है, लेकिन आप International Debt Mutual Funds के माध्यम से विदेशी बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। Read next blog....
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