विशेष वंश (जैसे कश्यप ऋषि के वंशज) के बारे में विस्तार से?

महर्षि कश्यप को 'सृष्टि का पिता' कहा जाता है क्योंकि ब्रह्मांड के लगभग हर जीव का मूल संबंध उन्हीं से है। दक्ष प्रजापति की 13 पुत्रियों से कश्यप ऋषि का जो वंश चला, वह केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें दिव्य और दानवीय दोनों शक्तियाँ शामिल थीं। यहाँ कश्यप ऋषि के मुख्य वंशों का विस्तृत विवरण है: 1. अदिति से 'देवता' (आदित्य) अदिति कश्यप की सबसे ज्येष्ठ और सात्विक पत्नी थीं। उनसे 12 आदित्यों का जन्म हुआ, जो ब्रह्मांड के संचालन में मुख्य भूमिका निभाते हैं: * प्रमुख आदित्य: इंद्र (देवराज), विष्णु (वामन अवतार), सूर्य (विवस्वान), वरुण, मित्र और अर्यमा। * इन्ही के वंश से आगे चलकर विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु हुए, जिनसे समस्त मानव जाति चली। 2. दिति से 'दैत्य' दिति से असुरों की उत्पत्ति हुई। दिति अदिति की सगी बहन थीं, लेकिन उनके पुत्र देवताओं के विरोधी बने: * प्रमुख पुत्र: हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु। * प्रसिद्ध वंशज: भक्त प्रह्लाद, विरोचन और राजा बलि। 3. दनु से 'दानव' दनु से 100 पुत्रों का जन्म हुआ जो 'दानव' कहलाए। ये दैत्यों से अलग प्रजाति मानी जाती है। * प्रमुख दानव: द्विमुर्धा, शम्बर, अरिष्ट और नमुचि। 4. कद्रू और विनता (नाग और पक्षी) इन दोनों बहनों के बीच की प्रतिस्पर्धा से जल और नभ के जीवों का विस्तार हुआ: * कद्रू: इनसे सहस्रों नागों का जन्म हुआ, जिनमें शेषनाग, वासुकी और तक्षक प्रमुख हैं। * विनता: इनसे गरुड़ (भगवान विष्णु के वाहन) और अरुण (सूर्य के सारथी) का जन्म हुआ। 5. सुरसा और इला * सुरसा: इनसे 'यातुधान' और राक्षसों की कुछ प्रजातियों का जन्म हुआ (रामायण में हनुमान जी की भेंट इन्हीं से समुद्र पार करते समय हुई थी)। * इला: इनसे पृथ्वी की समस्त वनस्पतियों, वृक्षों और लताओं की उत्पत्ति मानी जाती है। 6. अन्य महत्वपूर्ण पत्नियाँ और वंश | पत्नी | उत्पत्ति/वंश | |---|---| | मुनि | अप्सराएँ और गंधर्व (देवलोक के गायक और नर्तक) | | अरिष्टा | गंधर्वों की एक विशेष श्रेणी | | सुरभि | गाय (कामधेनु), भैंस और दो खुर वाले पशु | | ताम्रा | बाज, गिद्ध और शिकारी पक्षी | | क्रोधवशा | तीखे दांतों वाले हिंसक जीव और डंक वाले कीड़े | कश्यप वंश का प्रभाव ऋषि कश्यप का महत्व इतना अधिक है कि आज भी सनातन धर्म में जब किसी व्यक्ति को अपना 'गोत्र' ज्ञात नहीं होता, तो उसे 'कश्यप गोत्र' का माना जाता है। इसका अर्थ है कि हम अंततः उन्हीं के वंश की किसी न किसी धारा से जुड़े हैं। एक रोचक तथ्य: कश्यप ऋषि के नाम पर ही 'कश्यप सागर' (Caspian Sea) और 'कश्यपपुर' (कश्मीर) का नाम पड़ा माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने ही अपनी तपस्या से कश्मीर घाटी से पानी बाहर निकालकर उसे रहने योग्य बनाया था। क्या आप जानना चाहेंगे कि कैसे कश्यप पुत्र विवस्वान (सूर्य) से 'इक्ष्वाकु वंश' शुरू हुआ, जिसमें आगे चलकर भगवान राम ने जन्म लिया?

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