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भारत में व्यक्तिगत इनकम टैक्स (Income Tax) फाइल करना अब पूरी तरह डिजिटल है। इसे e-Filing कहा जाता है। अगर आपकी सालाना आय ₹2.5 लाख या ₹3 लाख (चुनी गई टैक्स व्यवस्था के अनुसार) से अधिक है, तो आपको रिटर्न भरना चाहिए।
यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया दी गई है:
1. ज़रूरी दस्तावेज़ इकट्ठा करें
फाइलिंग शुरू करने से पहले ये चीज़ें अपने पास रखें:
* PAN और Aadhaar कार्ड।
* Form 16: अगर आप नौकरीपेशा (Salary) हैं, तो आपकी कंपनी यह देगी।
* AIS/TIS (Annual Information Statement): इनकम टैक्स पोर्टल से इसे डाउनलोड करें, इसमें आपके साल भर के ब्याज, डिविडेंड और बड़े खर्चों का ब्योरा होता है।
* Bank Statements: बैंक खातों में मिले ब्याज की जानकारी के लिए।
* निवेश के सबूत: LIC, PPF, बच्चों की फीस, होम लोन आदि (अगर आप 'Old Tax Regime' चुन रहे हैं)।
2. सही ITR फॉर्म का चुनाव करें
* ITR-1 (Sahaj): यदि आपकी आय सैलरी, एक घर और ब्याज से है और कुल आय ₹50 लाख तक है।
* ITR-2: यदि आपकी आय सैलरी के साथ-साथ शेयर बाज़ार (Capital Gains) या एक से ज़्यादा घरों से है।
* ITR-3/4: यदि आपकी आय व्यापार (Business) या प्रोफेशन से है।
3. पोर्टल पर लॉगिन और फाइलिंग प्रक्रिया
* लॉगिन: Income Tax Portal पर जाएं और अपने PAN को 'User ID' की तरह उपयोग करके लॉगिन करें।
* File Now: 'e-File' > 'Income Tax Returns' > 'File Income Tax Return' पर क्लिक करें।
* Assessment Year (AY) चुनें: ध्यान रहे, अगर आप 2024 में हुई कमाई का टैक्स भर रहे हैं, तो AY 2025-26 चुनें।
* Online Mode: 'Online' फाइलिंग मोड चुनें।
* विवरण भरें:
* Personal Info: अपनी निजी जानकारी और बैंक खाता कन्फर्म करें।
* Gross Total Income: यहाँ आपकी सैलरी और अन्य आय पहले से भरी हुई (Pre-filled) आएगी, उसे क्रॉस-चेक करें।
* Deductions: अपनी टैक्स बचत (जैसे 80C) का विवरण डालें।
* टैक्स गणना: पोर्टल खुद बताएगा कि आपको टैक्स देना है या आपका रिफंड बन रहा है।
4. ई-वेरिफिकेशन (सबसे ज़रूरी स्टेप)
रिटर्न सबमिट करने के बाद उसे Verify करना अनिवार्य है। इसके बिना आपकी फाइलिंग अधूरी मानी जाएगी।
* सबसे आसान तरीका Aadhaar OTP के जरिए वेरिफिकेशन करना है।
* फाइल करने के 30 दिनों के भीतर वेरिफिकेशन पूरा करें।
नई vs पुरानी टैक्स व्यवस्था (New vs Old Regime)
* New Regime: इसमें टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन आप निवेश (जैसे LIC, HRA) पर छूट नहीं ले सकते। यह अब 'Default' व्यवस्था है।
* Old Regime: इसमें टैक्स की दरें ज़्यादा हैं, लेकिन आप होम लोन, इंश्योरेंस और अन्य निवेशों पर बड़ी छूट ले सकते हैं।
> टिप: फाइलिंग के दौरान AIS (Annual Information Statement) को ज़रूर चेक करें ताकि कोई भी बैंक ब्याज या इनकम छूट न जाए, वरना बाद में नोटिस आने का डर रहता है।
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