आपके विशिष्ट उत्पाद (Product) के लिए आयात निर्यात बिजनेस में कौन सी एजेंसी (जैसे APEDA या मर्चेंट एक्सपोर्ट काउंसिल) सबसे अच्छी रहेगी?

आयात निर्यात व्यवसाय के लिए सही एजेंसी का चुनाव पूरी तरह से आपके उत्पाद (Product) पर निर्भर करता है। भारत में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने उत्पादों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। अगर आप अभी शुरुआत कर रहे हैं और उलझन में हैं, तो यहाँ एक सरल गाइड है जो आपको सही चुनाव करने में मदद करेगी: 1. उत्पाद के आधार पर सही एजेंसी | यदि आपका उत्पाद यह है... | तो यह एजेंसी सबसे अच्छी है: | मुख्य लाभ | |---|---|---| | चावल, दाल, फल, डेयरी या प्रोसेस्ड फूड | APEDA | क्वालिटी सर्टिफिकेट और वैश्विक फूड एक्सपो में एंट्री। | | मशीनरी, लोहा, ऑटो पार्ट्स या इलेक्ट्रॉनिक्स | EEPC | तकनीकी गाइडेंस और विदेशी ट्रेड फेयर्स में स्टॉल। | | हस्तशिल्प (Handicrafts) या घर की सजावट | EPCH | डिजाइन सपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संपर्क। | | दवाइयां (Medicines) या हर्बल उत्पाद | PHARMEXCIL | विभिन्न देशों के ड्रग रेगुलेशन की जानकारी। | | चमड़ा (Leather) और जूते | CLE | अंतरराष्ट्रीय फैशन ट्रेंड्स और बाज़ार की जानकारी। | 2. अगर आप "मर्चेंट एक्सपोर्टर" हैं (खुद सामान नहीं बनाते) यदि आप किसी से सामान खरीदकर उसे अपने नाम से विदेश भेज रहे हैं, तो आपके पास दो विकल्प हैं: * उत्पाद विशिष्ट EPC: अगर आप सिर्फ एक ही तरह का सामान (जैसे सिर्फ कपड़े) बेच रहे हैं, तो उसी की परिषद (जैसे AEPC) से जुड़ें। * FIEO (Federation of Indian Export Organisations): यदि आप एक से ज्यादा श्रेणियों के उत्पाद (मल्टी-प्रोडक्ट) निर्यात करना चाहते हैं, तो FIEO सबसे अच्छा है। इसे सभी निर्यात परिषदों की 'अम्ब्रेला बॉडी' माना जाता है। 3. आपको एजेंसी (EPC) की ज़रूरत क्यों है? निर्यात के व्यापार में सिर्फ सामान भेजना काफी नहीं होता, आपको सरकारी लाभ भी चाहिए होते हैं: * RCMC प्राप्त करना: बिना इसके आप ड्यूटी ड्रॉबैक (Tax refund) या अन्य सरकारी सब्सिडी का दावा नहीं कर सकते। * मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (MAI): विदेशी मेलों में जाने के लिए सरकार से यात्रा और स्टॉल के खर्च में छूट मिलना। * क्रेडिबिलिटी: विदेशी खरीदार उन निर्यातकों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं जो किसी सरकारी परिषद के सदस्य होते हैं। आपके लिए अगला कदम: सबसे पहले अपने उत्पाद का HS Code (Harmonized System Code) पता करें। इसके बाद ही तय होगा कि कौन सी एजेंसी आपको सबसे ज़्यादा फायदा पहुँचाएगी।

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