वेनेज़ुएला से तेल खरीदने पर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?

वेनेज़ुएला से तेल खरीदने का मुद्दा भारत और अमेरिका के संबंधों के लिए एक "दोधारी तलवार" जैसा है। जनवरी 2026 के ताजा घटनाक्रमों (जैसे वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और नई व्यवस्था) ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। भारत-अमेरिका संबंधों पर इसके संभावित असर को हम निम्नलिखित बिंदुओं में समझ सकते हैं: 1. वाशिंगटन का "नया फ्रेमवर्क" और भारत की स्थिति जनवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब भारत को वेनेज़ुएला से तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए तैयार है, लेकिन एक शर्त के साथ। * अमेरिकी नियंत्रण: अमेरिका चाहता है कि यह व्यापार उसके द्वारा बनाए गए एक "विशेष ढांचे" के तहत हो, जहाँ तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा अमेरिकी नियंत्रण वाले खातों में जाए। * असर: यदि भारत इस ढांचे के तहत तेल खरीदता है, तो इससे अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग (Energy Cooperation) मजबूत होगा, क्योंकि भारत अमेरिका की नई वेनेज़ुएला नीति का समर्थन करता हुआ दिखेगा। 2. रूसी तेल बनाम वेनेज़ुएला का तेल (रणनीतिक दबाव) अमेरिका वर्तमान में भारत पर रूस से तेल की खरीद कम करने के लिए भारी दबाव बना रहा है। * विकल्प के रूप में वेनेज़ुएला: अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल को भारत के लिए एक "विकल्प" की तरह पेश कर रहा है ताकि भारत रूस पर अपनी निर्भरता कम करे। * तनाव का बिंदु: ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम नहीं की, तो भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Tariffs) 500% तक बढ़ाए जा सकते हैं। ऐसे में वेनेज़ुएला से तेल खरीदना भारत के लिए अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने का एक जरिया बन सकता है। 3. भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) भारत हमेशा अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने का पक्षधर रहा है। * चुनौती: यदि भारत पूरी तरह से अमेरिका द्वारा नियंत्रित फ्रेमवर्क में वेनेज़ुएला से तेल खरीदता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जा सकता है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति के लिए वाशिंगटन पर निर्भर है। * संतुलन: भारत की कोशिश होगी कि वह अमेरिका को नाराज किए बिना अपनी जरूरतों के हिसाब से तेल खरीदे, जैसा उसने ईरान और रूस के मामले में किया है। 4. चीन का कारक (The China Factor) वेनेज़ुएला के तेल का अब तक सबसे बड़ा खरीदार चीन रहा है। * साझा हित: अमेरिका चाहता है कि वेनेज़ुएला का तेल चीन के बजाय भारत जैसे लोकतांत्रिक और मित्र देशों के पास जाए। * असर: इस मोर्चे पर भारत और अमेरिका के हित आपस में मिलते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक निकटता बढ़ सकती है। निष्कर्ष: सकारात्मक या नकारात्मक? कुल मिलाकर, यदि भारत अमेरिकी शर्तों और वैश्विक प्रतिबंधों के दायरे में रहकर वेनेज़ुएला से तेल खरीदता है, तो संबंधों में सुधार होगा। यह भारत को सस्ते तेल का स्रोत देगा और अमेरिका को रूस के खिलाफ एक कूटनीतिक जीत। हालांकि, यदि भारत अमेरिकी नियंत्रण से बाहर जाकर (स्वतंत्र रूप से) व्यापार करने की कोशिश करता है, तो इससे प्रतिबंधों (Sanctions) और व्यापार युद्ध (Trade War) का खतरा पैदा हो सकता है।

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