- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
पुष्यमित्र शुंग प्राचीन भारतीय इतिहास के एक अत्यंत प्रभावशाली शासक थे, जिन्होंने शुंग राजवंश की स्थापना की। उन्हें मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद मगध की सत्ता संभालने और वैदिक धर्म के पुनरुत्थान के लिए जाना जाता है।
यहाँ उनके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. सत्ता का उदय (185 ईसा पूर्व)
पुष्यमित्र शुंग अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ के सेनापति (सेनानी) थे। उन्होंने 185 ईसा पूर्व में एक सैन्य निरीक्षण के दौरान बृहद्रथ की हत्या कर दी और मगध के सिंहासन पर अधिकार कर लिया। इस तरह मौर्य वंश का अंत हुआ और शुंग वंश की शुरुआत हुई।
2. वैदिक धर्म का पुनरुत्थान
पुष्यमित्र को ब्राह्मण धर्म (वैदिक धर्म) का संरक्षक माना जाता है। उनके शासनकाल की कुछ प्रमुख धार्मिक विशेषताएं इस प्रकार हैं:
* अश्वमेध यज्ञ: उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान दो बार अश्वमेध यज्ञ किए। इन यज्ञों के पुरोहित महान व्याकरणविद् पतंजलि थे।
* सांस्कृतिक विकास: उनके समय में संस्कृत भाषा और हिंदू परंपराओं को फिर से राजकीय संरक्षण मिला।
3. सैन्य उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ
पुष्यमित्र एक कुशल सेनानी थे और उन्होंने अपने साम्राज्य की सीमाओं की रक्षा के लिए कई युद्ध लड़े:
* यवन आक्रमण (यूनानी): उनके समय में भारत पर यवनों (Indo-Greeks) के आक्रमण हुए। पुष्यमित्र के पौत्र वसुमित्र ने सिंधु नदी के तट पर यवनों को पराजित किया था।
* विदर्भ का युद्ध: उन्होंने विदर्भ (बरार) के राजा यज्ञसेन को हराकर उसे अपने अधीन किया।
4. प्रशासनिक केंद्र
शुंग काल में मगध की राजधानी पाटलिपुत्र ही रही, लेकिन विदिशा (मध्य प्रदेश) का महत्व बहुत बढ़ गया और वह एक प्रमुख सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरा।
5. विवाद और कला
* बौद्ध धर्म के साथ संबंध: कुछ बौद्ध ग्रंथों (जैसे दिव्यवदान) में पुष्यमित्र को बौद्धों का उत्पीड़क बताया गया है। हालांकि, कई इतिहासकार इससे असहमत हैं क्योंकि उनके शासनकाल के दौरान ही भरहुत स्तूप का विस्तार हुआ और सांची के स्तूप की सुरक्षा दीवारें (Railings) पत्थर की बनाई गईं।
* वास्तुकला: शुंग काल में कला में लकड़ी के स्थान पर पत्थर का प्रयोग अधिक होने लगा।
संक्षिप्त विवरण तालिका
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राजवंश | शुंग राजवंश |
| शासन काल | लगभग 185 ई.पू. से 149 ई.पू. |
| उपाधि | सेनानी |
| राजधानी | पाटलिपुत्र और विदिशा |
| प्रमुख विद्वान | महर्षि पतंजलि |
- Get link
- X
- Other Apps
Comments