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महाभारत के युद्ध में भगदत्त एक अत्यंत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण योद्धा थे। वे प्राग्ज्योतिषपुर (आधुनिक असम के पास का क्षेत्र) के राजा थे और नरकासुर के पुत्र थे।
यहाँ उनके बारे में कुछ मुख्य बातें दी गई हैं:
1. परिचय और वंशावली
* पिता: भगदत्त नरकासुर के पुत्र थे। श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था, लेकिन बाद में भगदत्त को वहां का राजा बनाया गया।
* संबंध: वे पांडवों के पिता पांडु के मित्र थे और अर्जुन का बहुत सम्मान करते थे। इसके बावजूद, युद्ध में उन्होंने कौरवों का साथ दिया।
2. पराक्रम और हाथी 'सुप्रतीक'
भगदत्त के पास 'सुप्रतीक' नाम का एक विशाल और दिव्य हाथी था। यह हाथी युद्ध में तबाही मचाने के लिए प्रसिद्ध था। कहा जाता है कि सुप्रतीक इतना शक्तिशाली था कि उसने भीम और सात्यकि जैसे महान योद्धाओं को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
3. वैष्णवास्त्र के स्वामी
भगदत्त के पास अमोघ वैष्णवास्त्र था, जो उन्हें अपने पिता नरकासुर से प्राप्त हुआ था। यह अस्त्र कभी भी अपने लक्ष्य को विफल नहीं होने देता था। महाभारत के युद्ध के दौरान, जब उन्होंने यह अस्त्र अर्जुन पर चलाया, तो भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की रक्षा करने के लिए स्वयं को आगे कर दिया। कृष्ण के स्पर्श से वह अस्त्र एक वैजयंती माला में बदल गया।
4. कुरुक्षेत्र का युद्ध और मृत्यु
* किसके पक्ष में: भगदत्त ने कौरवों की ओर से युद्ध लड़ा। वे वृद्ध होने के बावजूद अत्यंत तेजस्वी और वीर योद्धा थे।
* युद्ध: 12वें दिन के युद्ध में अर्जुन और भगदत्त के बीच भीषण संग्राम हुआ।
* मृत्यु: अर्जुन ने एक विशेष बाण से भगदत्त की आंखों पर बंधी पट्टी (जो उनकी झुर्रियों वाली पलकों को ऊपर रखती थी ताकि वे देख सकें) को काट दिया। इससे भगदत्त अंधे हो गए और अर्जुन ने अवसर पाकर उनका वध कर दिया।
> एक रोचक तथ्य: भगदत्त को 'पर्वतपुत्र' के रूप में भी जाना जाता था और वे हाथियों के संचालन की कला (गज-शिक्षा) में विश्व के सबसे श्रेष्ठ योद्धाओं में गिने जाते थे।
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