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सोमनाथ मंदिर पर एक स्तंभ है जिस पर प्राचीन भाषा में कुछ लिखा हुआ है लेकिन वहां पर एक सीधी रेखा का महत्व क्या है
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सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित उस स्तंभ को 'बाण स्तंभ' (Baan Stambh) कहा जाता है। यह स्तंभ न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि प्राचीन भारतीय विज्ञान और भूगोल की सटीकता की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
स्तंभ पर क्या लिखा है?
इस स्तंभ पर एक संस्कृत श्लोक लिखा है:
> 'आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत, अबाधित ज्योतिर्मार्ग'
>
इसका सरल अर्थ यह है कि: "समुद्र के इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव (South Pole) तक सीधी रेखा में एक भी बाधा (पर्वत या द्वीप) नहीं है।"
सीधी रेखा का महत्व और रहस्य
स्तंभ के ऊपर एक तीर (बाण) बना हुआ है, जो दक्षिण दिशा की ओर इशारा करता है। इस सीधी रेखा का महत्व निम्नलिखित है:
* अबाधित मार्ग: यदि आप सोमनाथ मंदिर के उस बिंदु से दक्षिण ध्रुव की ओर एक सीधी रेखा खींचें, तो बीच में कोई भी भू-भाग (Landmass) नहीं आता। पूरे रास्ते में केवल समुद्र ही है।
* प्राचीन भूगोल का ज्ञान: यह स्तंभ इस बात का प्रमाण है कि सदियों पहले, जब आधुनिक सैटेलाइट या मैप्स नहीं थे, तब भी भारतीय ऋषियों और खगोलविदों को यह पता था कि पृथ्वी गोल है और दक्षिण ध्रुव कहाँ स्थित है।
* नेविगेशन का केंद्र: कई विद्वानों का मानना है कि प्राचीन काल में यह बिंदु समुद्री यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-सूचक का काम करता था।
* ज्योतिर्मार्ग: श्लोक में 'ज्योतिर्मार्ग' शब्द का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ प्रकाश का मार्ग भी हो सकता है, जो सूर्य या नक्षत्रों की स्थिति से जुड़ा हो।
ऐतिहासिक महत्व
वर्तमान में जो बाण स्तंभ हम देखते हैं, उसका जीर्णोद्धार मंदिर के साथ ही आधुनिक काल में किया गया था, लेकिन इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में बहुत पहले से मिलता है। यह दर्शाता है कि हमारे पूर्वज समुद्र विज्ञान (Oceanography) और भूगोल में कितने निपुण थे।
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