PMS में निवेश से पहले जानकारी है जरूरी

PMS (Portfolio Management Services) में निवेश करने से पहले उसके नियमों और बारीकियों को समझना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह म्यूचुअल फंड की तुलना में काफी अलग और जटिल होता है। यहाँ कुछ मुख्य बातें दी गई हैं जिन्हें आपको निवेश से पहले जानना चाहिए: 1. न्यूनतम निवेश (Minimum Investment) SEBI के नियमों के अनुसार, PMS में निवेश करने के लिए कम से कम ₹50 लाख की राशि अनिवार्य है। यह मुख्य रूप से उन निवेशकों (HNI) के लिए है जिनके पास बड़ी पूंजी और अधिक जोखिम उठाने की क्षमता है। 2. सीधे स्वामित्व (Direct Ownership) म्यूचुअल फंड में आपको फंड की 'यूनिट्स' मिलती हैं, लेकिन PMS में शेयर सीधे आपके अपने डीमैट अकाउंट में खरीदे जाते हैं। इसका मतलब है कि आप उन कंपनियों के सीधे शेयरधारक होते हैं। 3. फीस की संरचना (Fee Structure) PMS में निवेश करना थोड़ा महंगा हो सकता है। इसमें आमतौर पर तीन तरह की फीस होती है: * फिक्स्ड फीस (Fixed Fee): पोर्टफोलियो वैल्यू का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 1-2%)। * परफॉरमेंस फीस (Performance Fee): यदि प्रॉफिट एक निश्चित सीमा (Hurdle Rate) से ऊपर जाता है, तो मुनाफे का एक हिस्सा मैनेजर को देना होता है। * एग्जिट लोड (Exit Load): अगर आप समय से पहले पैसा निकालते हैं, तो भारी चार्ज लग सकता है। 4. टैक्स की देनदारी (Tax Implication) यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है। म्यूचुअल फंड में टैक्स तभी लगता है जब आप अपनी यूनिट्स बेचते हैं। लेकिन PMS में, जब भी फंड मैनेजर कोई शेयर बेचता है, तो वह कैपिटल गेन टैक्स के लिए आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी बन जाती है, भले ही आपने पैसा बैंक खाते में न निकाला हो। 5. निवेश के प्रकार * डिस्क्रीशनरी (Discretionary): फंड मैनेजर खुद तय करता है कि क्या खरीदना है और क्या बेचना है। * नॉन-डिस्क्रीशनरी (Non-Discretionary): मैनेजर आपको सलाह देता है, लेकिन आखिरी फैसला आपका होता है। 6. जोखिम और पारदर्शिता (Risk & Transparency) PMS पोर्टफोलियो अक्सर कंसेंट्रेटेड (Concentrated) होते हैं, यानी इसमें केवल 15-25 शेयर हो सकते हैं। यह अच्छी बढ़त दे सकते हैं, लेकिन बाजार गिरने पर जोखिम भी ज्यादा होता है। पारदर्शिता के मामले में आपको नियमित रूप से पोर्टफोलियो की रिपोर्ट दी जाती है।

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