हमारे कुछ एक महात्माओं ने लिखा है कि लक्ष्मी और सरस्वती का बिरला साथ होता है अर्थात जो सरस्वती की कृपा पात्र होते हैं वह बहुत कम लक्ष्मी के भी कृपा पात्र होते हैं
पर बहुदा सरस्वती की पूर्ण कृपा पात्र लक्ष्मी की परवाह नहीं करते उनकी इच्छा तो उनके आने की अवश्य होती है पर कठिनाइयां है कि हर तरह की लक्ष्मी को वे स्वीकार नहीं करना चाहते और शुद्ध रीत पर जैसा वे चाहते हैं वैसा इसका आगमन हो ना दुष्कर सा रहता है यदि लक्ष्मी महारानी कृपा भी की तो वे लोग उसको वैसा प्यार नहीं करते जैसा उसके मुखिय कृपा पात्र भक्त उसका आदर करते हैं
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