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अंग्रेजों ने देश छोड़ते समय भी भारत को कितना और कैसे लूटा 200 सालों में?
इसके पीछे दो मुख्य कारण थे:
भारत का विभाजन (Partition of India): जब 1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तो देश का एक बड़ा भूभाग, उपजाऊ जमीन (जैसे पंजाब और सिंध का हिस्सा) और फैक्ट्रियां पाकिस्तान में चली गईं। इस वजह से संयुक्त भारत की तुलना में स्वतंत्र भारत की अर्थव्यवस्था का आकार स्वाभाविक रूप से छोटा दिखने लगा।
मुद्रा और गणना का तरीका: आजादी के समय भारत की कुल जीडीपी (करंट प्राइसेज पर) लगभग 8,700 करोड़ रुपये के आसपास थी। इसलिए यह कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा कि जीडीपी रातों-रात आधी रह गई।
लेकिन, आपकी यह बात 100% सच है कि अंग्रेजों ने भारत को कंगाल कर दिया था। जब अंग्रेज भारत आए, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 23% थी, और जब वो छोड़कर गए तो यह 3% से भी कम रह गई थी।
2. "ड्रेन ऑफ वेल्थ" (धन का निष्कासन): अंग्रेजों ने भारत को कैसे लूटा?
ि अंग्रेज कर्मचारी पेंशन और भारत में किए गए निर्माण का पैसा कैश में ले गए—उसे इतिहास में "होम चार्जेस" (Home Charges) और "ड्रेन ऑफ वेल्थ" (Drain of Wealth) कहा जाता है। इस सिद्धांत को सबसे पहले महान स्वतंत्रता सेनानी दादाभाई नौरोजी ने उजागर किया था।
अंग्रेज इन तरीकों से भारत का पैसा ब्रिटेन भेजते थे:
सरकारी और सैन्य कर्मचारियों की पेंशन: भारत में काम करने वाले ब्रिटिश अफसर, जज और सैनिक जब रिटायर होते थे, तो उनकी पूरी जिंदगी की भारी-भरकम पेंशन भारत के टैक्सपेयर्स के पैसे से ब्रिटेन भेजी जाती थी।
रेलवे पर गारंटीड मुनाफा: अंग्रेजों ने भारत में जो रेलवे लाइनें बिछाईं, उसके लिए उन्होंने ब्रिटिश निवेशकों को 5% पक्का मुनाफा (Guaranteed Return) देने का वादा किया था। यह मुनाफा भारत के खजाने से निकालकर ब्रिटिश उद्योगपतियों को कैश में दिया जाता था। यानी भारत के पैसे से भारत में ही निर्माण हुआ, लेकिन उसका मुनाफा ब्रिटेन गया।
ब्रिटिश कर्ज का ब्याज: भारत पर शासन करने के लिए, या अंग्रेजों द्वारा लड़े गए युद्धों (जैसे प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध) के लिए जो कर्ज लिया गया था, उसका ब्याज भी भारत के राजस्व (Revenue) से चुकाया जाता था।
व्यापार का एकतरफा फायदा: भारत से कच्चा माल (जैसे कपास, नील) कौड़ियों के दाम पर ब्रिटेन भेजा जाता था, और वहाँ की फैक्ट्रियों में बना तैयार माल महंगे दामों पर भारत के बाजारों में जबरन बेचा जाता था। मुनाफे की यह पूरी रकम ब्रिटेन चली जाती थी।
निष्कर्ष
संक्षेप में कहें तो, आजादी के तुरंत बाद जीडीपी का आंकड़ा अचानक गिरने का मुख्य कारण देश का विभाजन था। लेकिन लंबी अवधि में भारत की अर्थव्यवस्था के बर्बाद होने का कारण वही था जो आपने बिल्कुल सही पकड़ा—अंग्रेजों द्वारा भारत की संपत्ति, टैक्स और संसाधनों को निचोड़कर अपने देश (ब्रिटेन) ले जाना।
आजादी के समय भारत एक बेहद गरीब और शोषित देश बन चुका था, जिसे हमारे पूर्वजों और वैज्ञानिकों ने तिनका-तिनका जोड़कर भारतीयों ने 78 साल बाद भारत फिर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया है।
यही कारण है पूरे देश में औपनिवेशिक काल के जो नाम थे जगह आद के वो अब हटाए जा रहे हे!
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