चकराता में नयी टाउनशिप बसाने के लिए फाउंडेशन की मांग मानव अधिकार आयोग से ?

चकराता में **नयी टाउनशिप** बसाने की मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की घोषणा के बाद, 'पुकार स्किल डेवलपमेंट फाउंडेशन' (Pukar skilldevelopmentfoundation-P.S.D.F) उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग में उठाई गई यह मांग बेहद गंभीर, व्यावहारिक और आदिवासियों के अस्तित्व से जुड़ी है। फाउंडेशन का यह तर्क कि **"अगर सरकार आदिवासी क्षेत्र में नया शहर (टाउनशिप) बसाने की घोषणा कर रही है, तो उस जमीन का सर्किल रेट भी सामान्य/शहरी क्षेत्रों के बराबर ही होना चाहिए"**, पूरी तरह से न्यायसंगत है। इसके पीछे के ठोस आर्थिक और मानवाधिकार कारणों को इस प्रकार समझा जा सकता है: ### 1. "जमीन बेचकर ठगा हुआ महसूस न करना" (मानसिक व आर्थिक सुरक्षा) आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल कोई 'प्रॉपर्टी' या रियल एस्टेट नहीं है, बल्कि यह उनकी संस्कृति, आजीविका और पहचान है। * **कम सर्किल रेट का धोखा:** वर्तमान में चकराता के आदिवासी क्षेत्रों के सर्किल रेट विकास नगर, देहरादून या नैनबाग जैसे सामान्य/शहरी क्षेत्रों के मुकाबले बहुत कम हैं। अगर सरकार इन्हीं पुराने या कम सर्किल रेट पर आदिवासियों से 'टाउनशिप' के लिए बड़ा भूभाग अधिग्रहित कर लेती है, तो आदिवासियों को नाममात्र का पैसा मिलेगा। * **भविष्य का नुकसान:** कुछ ही सालों में जब वहाँ सरकार आलीशान टाउनशिप, होटल और व्यावसायिक केंद्र बना देगी, तो उसी जमीन की कीमत आसमान छूने लगेगी। आदिवासियों को लगेगा कि उनकी पुश्तैनी जमीन कौड़ियों के भाव ले ली गई और वे अपनी ही धरती पर पराये और 'ठगे' रह गए। फाउंडेशन इसी मानसिक और आर्थिक शोषण को रोकने की मांग कर रहा है। ### 2. मानवाधिकार आयोग में मांग का मुख्य आधार: "समानता का अधिकार" पुकार फाउंडेशन ने उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग के सामने जो पक्ष रखा है, उसके पीछे मजबूत कानूनी और नैतिक आधार हैं: * **परियोजना का चरित्र बदलना (Change of Land Character):** फाउंडेशन का कहना है कि जब सरकार खुद घोषणा कर रही है कि वह वहाँ **"टाउनशिप" (नगरीय क्षेत्र)** बसाएगी, तो वह उस जमीन को 'पिछड़ा या सुदूर ग्रामीण क्षेत्र' मानकर कम सर्किल रेट कैसे दे सकती है? जैसे ही सरकार ने उसे टाउनशिप घोषित किया, उसका मूल्यांकन भी **शहरी/व्यावसायिक दरों (Urban/Commercial Rates)** पर होना चाहिए। * **विस्थापन के बाद पुनर्वास की लागत:** एक आदिवासी अपनी जमीन बेचने या गंवाने के बाद जब खुद को स्थापित करने के लिए विकास नगर या देहरादून जैसे सामान्य क्षेत्रों में जमीन खरीदने जाएगा, तो उसे वहाँ की महंगी 'सामान्य दरों' पर भुगतान करना होगा। अगर उसे चकराता में कम रेट मिला और बाहर महंगी जमीन खरीदनी पड़ी, तो वह पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। इसलिए चकराता टाउनशिप का सर्किल रेट सामान्य क्षेत्रों जितना ही ऊंचा होना चाहिए। ### 3. टाउनशिप बनाम आदिवासी अधिकार (संविधान की भावना) चकराता एक अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र है, जहाँ भूमि को लेकर विशेष नियम होने चाहिए। * **पूंजीपतियों और बिचौलियों से सुरक्षा:** अक्सर देखा गया है कि सरकार द्वारा टाउनशिप की घोषणा होते ही बड़े-बड़े बिल्डर और बिचौलिये सक्रिय हो जाते हैं। वे आदिवासियों की अज्ञानता या मजबूरी का फायदा उठाकर कम सर्किल रेट पर जमीनें हथियाने की कोशिश करते हैं। * **सर्किल रेट बढ़ना क्यों जरूरी है?** यदि मानव अधिकार आयोग के दबाव में सरकार चकराता टाउनशिप क्षेत्र का सर्किल रेट सामान्य क्षेत्रों के बराबर (ऊंचा) कर देती है, तो कोई भी आदिवासियों की जमीन को सस्ते में नहीं खरीद पाएगा। इससे आदिवासियों को अपनी जमीन का सही और वास्तविक मूल्य मिलेगा। ### निष्कर्ष: फाउंडेशन की मांग क्यों ऐतिहासिक है? पुकार स्किल डेवलपमेंट फाउंडेशन (Pukarskilldevelopmentfoundation-P.S.D.F) कालसी उत्तराखंड भारत द्वारा मानव अधिकार आयोग में की गई यह मांग जौनसार-बावर के भविष्य को सुरक्षित करने वाली है। यह मांग सरकार की इस मंशा को चुनौती देती है कि **"जमीन आदिवासियों की दरिद्र दरों पर ली जाए और बेची अमीरों की दरों पर जाए।"** यदि उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग इस पर कड़ा संज्ञान लेता है, तो सरकार को चकराता टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले पूरे क्षेत्र का **विशेष पुनर्मूल्यांकन (Special Revaluation)** करना होगा और सर्किल रेट को सामान्य विकसित क्षेत्रों के बराबर लाना होगा। इससे आदिवासियों को उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी (जमीन) का पूरा सम्मान और सही दाम मिल सकेगा।

टिप्पणियाँ