आसन आर्द्रभूमि 10 किमी जैव विविधता का संरक्षण और विकास नगर ढकरानी क्षेत्र मैं पारिस्थितिक तंत्र छेड़ने पर रोक?

**आसन आर्द्रभूमि (Asan Wetland / आसन बैराज)** और उसके आसपास के **10 किलोमीटर के दायरे (Eco-Sensitive Zone)** में जैव विविधता का संरक्षण और विकासनगर-ढकरानी क्षेत्र में अवैध खनन व पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) से छेड़छाड़ पर रोक लगाने के लिए सरकार और वन विभाग की एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण योजना है। आसन आर्द्रभूमि उत्तराखंड का पहला **रामसर स्थल (Ramsar Site)** है, जो अंतरराष्ट्रीय महत्व का है। इस पूरे क्षेत्र को बचाने के लिए जो योजना और नियम लागू किए गए हैं, उनका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है: ## 1. 10 किमी का पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आसन कंजर्वेशन रिजर्व के चारों ओर 10 किलोमीटर तक के दायरे को **इको-सेंसिटिव जोन (ESZ)** के रूप में अधिसूचित किया गया है। * **उद्देश्य:** इस जोन का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमि के आसपास एक 'शॉक एब्जॉर्बर' (सुरक्षा कवच) बनाना है, ताकि बाहरी मानवीय गतिविधियों का असर यहाँ के वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों पर न पड़े। * **निगरानी:** इस क्षेत्र में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए 'आसन वन्यजीव अभ्यारण्य निगरानी समिति' और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से विशेष अनुमति लेनी अनिवार्य है। ## 2. विकासनगर-ढकरानी क्षेत्र में खनन और छेड़छाड़ पर पूर्ण रोक ढकरानी, विकासनगर और आसन नदी का जो क्षेत्र इस 10 किमी के दायरे में आता है, वहाँ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर सख्त पाबंदी है: * **खनन पर प्रतिबंध:** आसन नदी और यमुना नदी के इस संवेदनशील क्षेत्र में हर प्रकार के अवैध खनन (रेत, बजरी, पत्थर उठाना) पर पूरी तरह रोक है। भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड या जेसीबी) का उपयोग प्रतिबंधित है। * **क्रशर उद्योग पर नियम:** इस क्षेत्र में नए स्टोन क्रशर लगाने पर रोक है, और पुराने क्रशरों के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं ताकि ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। * **निर्माण कार्यों पर नियंत्रण:** नदी के बहाव क्षेत्र को मोड़ने, व्यावसायिक निर्माण करने या होटल/रिसॉर्ट्स द्वारा कचरा नदी में बहाने पर सख्त पाबंदी है। ## 3. जैव विविधता का संरक्षण (Biodiversity Conservation Plan) आसन आर्द्रभूमि सर्दियों में साइबेरिया, मध्य एशिया और चीन से आने वाले हजारों **प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds)** जैसे कि 'रुडी शेलडक' (सुरखी), 'मल्लार्ड', और 'रेड-क्रस्टेड पोचार्ड' का घर बनती है। इनके संरक्षण के लिए योजना में शामिल हैं: * **पक्षियों के आवास का सुधार:** जलाशय में जलीय वनस्पतियों (जैसे जलकुंभी) को हटाना ताकि पक्षियों को तैरने और मछली पकड़ने में आसानी हो। * **प्लास्टिक और प्रदूषण मुक्त क्षेत्र:** पूरे ढकरानी और बैराज क्षेत्र को "नो प्लास्टिक जोन" घोषित किया गया है। * **मछली पकड़ने पर रोक:** पक्षियों के भोजन (मछलियों और कीड़ों) को सुरक्षित रखने के लिए कमर्शियल फिशिंग पर रोक लगाई गई है। ## 4. विकास और 'इको-टूरिज्म' (Eco-Tourism) योजना सरकार इस क्षेत्र का विकास विनाशकारी तरीके से नहीं, बल्कि **पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly)** तरीके से कर रही है: * **पक्षी दर्शन (Bird Watching):** पर्यटकों के लिए बर्ड-वाचिंग टावर और दूरबीन केंद्र बनाए गए हैं, ताकि बिना शोर किए पक्षियों को देखा जा सके। * **स्थानीय रोजगार:** ढकरानी और विकासनगर के स्थानीय युवाओं को 'नेचर गाइड' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार मिले और वे संरक्षण में भी मदद करें। * **जागरूकता केंद्र:** यहाँ एक व्याख्या केंद्र (Interpretation Centre) स्थापित किया गया है जो आने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को जैव विविधता का महत्व समझाता है। > **मुख्य निष्कर्ष:** > इस पूरी योजना का सीधा मतलब यह है कि **"प्रकृति के साथ विकास"**। विकासनगर और ढकरानी क्षेत्र में यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था अवैध खनन करती है या पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाती है, तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत यह एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ड्रोन और गश्ती दलों के जरिए इसकी लगातार निगरानी करते हैं। >

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